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विज्ञान
किसानों को राहत:BU के वैज्ञानिकों ने खोजा मिर्च की फसल को बर्बाद करने वाले वायरस का इलाज, बचेगी लाखों की पैदावार
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (बीयू) के सूक्ष्म जीव विज्ञान (माइक्रोबायोलॉजी) विभाग की ‘मॉलिक्यूलर प्लांट वायरोलॉजी प्रयोगशाला’ ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शोध सफलता हासिल की है। यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मिर्च की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले एक बिल्कुल नए और खतरनाक वनस्पति वायरस (प्लांट वायरस) की पहचान की है। इस वायरस के कारण मिर्च के पौधों में ‘लीफ कर्ल’ (पत्तियों का सिकुड़ना, मुड़ना और सटना) की बीमारी फैल रही थी, जिससे 55% से अधिक फसल प्रभावित हो रही थी। बीयू के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार स्नेही और शोधार्थी अक्षिता सोनी के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘इंटरनेशनल यूनियन ऑफ माइक्रोबायोलॉजी सोसाइटीज’ की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘आर्काइव्स ऑफ वायरोलॉजी’ (2026) में प्रकाशित किया गया है। जांच में खुलासा: 89% ही मिला डीएनए अनुसंधान में सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई), लखनऊ का भी तकनीकी सहयोग रहा। वैज्ञानिकों ने अनूपपुर के खेतों से बीमार पौधों के नमूने लेकर जब ‘रोलिंग-सर्किल एम्प्लीफिकेशन’ (आरसीए) और ‘जेनबैंक’ डेटाबेस के जरिए इनके जीनोम की जांच की, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। नया वायरस ‘चिली लीफ कर्ल मध्य प्रदेश वायरस’: शोध में पाया गया कि यह वायरस पहले से मौजूद किसी भी बेगोमोवायरस से केवल 89.4% से 89.5% तक ही मेल खाता है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार 91% से कम समानता होने पर उसे नया वायरस माना जाता है। इसलिए इसे ‘चिली लीफ कर्ल मध्य प्रदेश वायरस’ (ChiLCMPV) नाम दिया गया है। किसानों, आम लोगों को खोज से फायदा फसल और आर्थिक नुकसान पर लगेगी रोक: अब तक किसान अनजान वायरस पर बेअसर पुरानी दवाइयाँ छिड़कते थे, जिससे पैसा और फसल दोनों बर्बाद होते थे। अब वायरस की सटीक आनुवंशिक संरचना (जिनेटिक स्ट्रक्चर) पता चलने से कृषि वैज्ञानिक इसके खिलाफ प्रभावी कीट-नियंत्रण और सुरक्षा नीतियां तैयार कर सकेंगे। बाजार में मिर्च की कीमतों में आएगी स्थिरता: बीमारी से जब मिर्च की फसल का उत्पादन गिरता है, तो बाजार में इसके दाम अचानक बढ़ जाते हैं। वायरस पर सही समय पर काबू पाने से उत्पादन बेहतर होगा, जिससे आम उपभोक्ताओं को वाजिब दाम पर मिर्च उपलब्ध रहेगी। अन्य फसलों को भी बचाया जा सकेगा: यह वायरस मिर्च के अलावा टमाटर जैसी अन्य महत्वपूर्ण सब्जी फसलों पर भी हमला करता है। समय रहते इसकी निगरानी शुरू होने से आसपास के अन्य जिलों में फसलों को चौपट होने से बचाया जा सकेगा।

राजस्थान में बारिश का अलर्ट, ठंड बढ़ी, माउंट आबू में पारा 15 से नीचे, दिन के तापमान में भी गिरावट
राजस्थान में तापमान गिरने से रात की ठंडक बढ़ गई है। माउंट आबू में पारा 14.6 डिग्री तक पहुंचा, जबकि कई जिलों में दिन का तापमान भी 2 डिग्री तक गिरा। 12 अक्टूबर से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिससे उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में बादल और कुछ जगह हल्की बारिश हो सकती है।

मई की आखिरी रात आसमान में दिखेगा ‘ब्लू मून’ का अद्भुत नजारा! जानें भारत में कब दिखेगी दुर्लभ पूर्णिमा
31 मई की रात आसमान एक खास खगोलीय घटना का गवाह बनने जा रहा है। ‘ब्लू मून’ नाम से मशहूर यह दुर्लभ पूर्णिमा लोगों को चांद का अनोखा रूप देखने का मौका देगी।
गाय के गोबर-पराली से बनी ‘गोमय समिधा’ को पेटेंट:हर साल बचेंगे 2 करोड़ पेड़, 90 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड गैस उत्सर्जन रुकेगा
सनातन संस्कृति में गाय को सर्वदेवमयी और गोमय को पवित्रतम माना गया है। अब उसी गोमय ने आधुनिक विज्ञान के साथ मिलकर देश की दो सबसे बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं पराली का धुआं और श्मशान में पेड़ों की कटाई का स्थायी समाधान खोज निकाला है। कोरोना त्रासदी के दौरान जब लकड़ियों के अभाव में नदियों में शव बहाए जाने के विचलित करने वाले दृश्य सामने आए थे, तब जयपुर के डॉ. सीताराम गुप्ता और अदिति गुप्ता ने देसी गाय के गोबर, पराली और वैदिक हवन सामग्री के सम्मिश्रण से लकड़ी का जैविक विकल्प तैयार किया, जिसे नाम दिया गया ‘गोमय समिधा’। इस नवाचार के प्रोडक्ट और प्रोसेस दोनों को अब आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय पेटेंट मिल गया है। यह तकनीक देश में प्रतिवर्ष अंतिम संस्कार के लिए कटने वाले करीब 2 करोड़ पेड़ों को बचाने और 90 लाख टन जहरीली कार्बन डाईऑक्साइड गैस के उत्सर्जन को रोकने में मील का पत्थर साबित होगी। आस्था + आधुनिक विज्ञान = नेट जीरो मोक्षधाम धार्मिक परंपराओं को विज्ञान से जोड़ते हुए इस अभियान को अब भारत सरकार के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थान नीरी (सीएसआईआर-नीरी, नागपुर) का साथ मिला है। लैब से श्मशान तक- इस तरह मिली सिद्धि यह पेटेंट केवल किसी उत्पाद का नहीं, बल्कि सनातन गो-सेवा और आधुनिक विज्ञान के मिलन की जीत है। जब आस्था पर्यावरण की रक्षा का माध्यम बन जाए, तो समाज अपने आप सशक्त होता है। -डॉ. सीताराम गुप्ता, गोमय फाउंडर

छात्रों को व्यावहारिक कौशल अपनाने के लिए प्रेरित किया
भास्कर न्यूज| पूर्णिया पूर्णिया महिला महाविद्यालय के शारदा विज्ञान भवन गैलरी में 2024-28 सत्र के सेमेस्टर 5 के विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप ओरिएंटेशन क्लास का आयोजन हुआ। प्राचार्य प्रो. अनंत गुप्ता के निर्देश पर सत्र रखा गया। कार्यक्रम में कंपनी के निदेशक ने इंटर्नशिप की पूरी प्रक्रिया बताई। इंडस्ट्री की मौजूदा जरूरतों पर जानकारी दी। करियर बनाने में इंटर्नशिप की भूमिका समझाई। छात्रों को व्यावहारिक कौशल अपनाने के लिए प्रेरित किया। ओरिएंटेशन की अध्यक्षता इंटर्नशिप सेल के समन्वयक डॉ. संजय कुमार दास ने की। सेल के सदस्य प्रो. कुमार गौरव, डॉ. अंकिता श्रीवास्तव मौजूद रहे। मेंटर डॉ. चिन्मय मोहंती और डॉ. रुचि गौर भी शामिल रहे। कार्यक्रम में डॉ. राकेश रोशन सिंह, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. रंजन कुमार, प्रो. मीना कुमारी रजक, डॉ. नीतू कुमारी, डॉ. मनीषा कुमारी, डॉ. सरिता कुमारी, डॉ. प्रेरणा, डॉ. प्रेरणा प्रिया, डॉ. दीपिका, डॉ. मिताली मीनू, डॉ. मसूद अली दीवान, अनिकेश आनंद सहित कई शिक्षक मौजूद रहे। सत्र के बाद विद्यार्थियों में इंटर्नशिप को लेकर उत्साह दिखा।
बिहार के 318 बाल वैज्ञानिकों में दिव्या टॉप-50 में शामिल
भास्कर न्यूज| पूर्णिया राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में पूर्णिया की बाल वैज्ञानिक दिव्या कुमारी ने अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 32वीं राज्य स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026 में बिहार के 38 जिलों से चयनित 318 बाल वैज्ञानिकों के बीच दिव्या ने अपने अभिनव प्रोजेक्ट के दम पर टॉप-50 में जगह बनाई है। किलकारी बिहार बाल भवन, पूर्णिया की दिव्या अब बेहतर तैयारी के साथ टॉप-30 में पहुंचने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं। दिव्या ने एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित स्मार्ट मेंस्ट्रुअल हेल्थ एंड हाइजीन मॉनिटरिंग किट तैयार की है। यह प्रोजेक्ट मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल होने वाले सैनिटरी पैड से उत्पन्न गैर-जैव अपघटनीय कचरे और पुनः उपयोग योग्य पैड की सफाई-सुखाने से जुड़ी स्वच्छता समस्याओं के समाधान पर केंद्रित है। इसके जरिए मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल की गई है। प्रोजेक्ट में प्राकृतिक एवं पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से बने पुनः उपयोग योग्य पैड, उचित सफाई और सुखाने की व्यवस्था शामिल है। राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य इस परियोजना में दिव्या के साथ टीम सदस्य सोनम कुमारी ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। दोनों बाल वैज्ञानिकों ने गाइड शिक्षक किरण भारती और किलकारी बिहार बाल भवन, पूर्णिया के विज्ञान प्रशिक्षक एवं प्रोजेक्ट मेंटर मो. सद्दाम हुसैन के मार्गदर्शन में शोध और प्रोजेक्ट तैयार किया। दिव्या का लक्ष्य प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना और मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी समस्याओं के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है। बच्चों की उपलब्धि पर प्रमंडल समन्वयक सहित अन्य ने बधाई दी।

धनतेरस पर कैसे करें विधि-विधान से पूजा? जानिए लक्ष्मी-कुबेर आराधना से लेकर खरीदारी तक की परंपरा और मान्यताएं
धनतेरस केवल सोना-चांदी और नए बर्तन खरीदने का पर्व नहीं, बल्कि आरोग्य, समृद्धि और सुखी जीवन की कामना से जुड़ा विशेष अवसर है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
रॉयल पब्लिक स्कूल में विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन, विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
सिटी रिपोर्टर | बोकारो रॉयल पब्लिक स्कूल सेक्टर-4 में बुधवार को विज्ञान प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के लगभग 400 बाल वैज्ञानिकों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता, वैज्ञानिक सोच और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए विभिन्न विषयों पर आकर्षक प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेक्टर-4 थाना प्रभारी नीतीश कुमार व डॉ. राजेंद्र प्रसाद पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार व एसके राय ने दीप प्रज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्राचार्य रूपम गुप्ता ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता और नई चीजें सीखने की जिज्ञासा विकसित करते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मॉडलों का अवलोकन किया व बच्चों से उनके प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी प्राप्त की। मौके पर शिक्षिकाएं विभा रानी, सुधा सिंह, पार्वती कुमारी, संगीता कुमारी, शकुंतला कुमारी, आरती कुमारी, विश्वजीत शर्मा, फिरोज अंसारी, ऋषभ कुमार आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई।

दो दशक तक स्वास्थ्य सेवा देने वाली डॉ. दुर्गावती को मिला भारत प्रतिभा सम्मान
भास्कर न्यूज | अंबागढ़ चौकी स्वास्थ्य सेवाओं व नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र छग प्रदेश में उत्कृष्ट कार्य करने पर वनांचल के ग्राम कौड़ीकसा निवासी डॉ. दुर्गावती कुंजाम उसारे को नई दिल्ली में भारत प्रतिभा सम्मान 2026 से नवाजा गया। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में डॉ. कुंजाम ने वर्ष 2004 में एक तीस बिस्तरा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अंबागढ़ चौकी में अपनी शासकीय सेवा की यात्रा आरंभ की। अपने दो दशकों की स्वास्थ्य सेवाओं व नर्सिंग शिक्षा के बूते पूरे छग प्रदेश में अपना एक विशिष्ट स्थान बना लिया। उन्हें यह पुरस्कार एक नवंबर को नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में दिया गया। कार्यक्रम में भारत की पूर्व विदेश व संस्कृति राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी, पद्मश्री कथक नृत्यांगना शोवना नारायण, भारत के कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री रामचेत चौधरी ने सम्मानित किया। नवीन जिले मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर पुरस्कृत होने वाली डॉ. कुंजाम जिले की प्रथम महिला है। विशेषकर नर्सिंग व स्वास्थ्य सेवाओं की फील्ड में कार्य कर रही स्थानीय बेटियों व महिलाओं में उत्साह का माहौल है। ब्लाक के एक छोटे से गांव कौड़ीकसा में साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली डॉ. कुंजाम उसारे नवीन जिला में आदिवासी व किसान नेता शिक्षक स्व. लखन शाह कुंजाम की पुत्री हैं।

Rewari News: विज्ञान प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए मॉडल
Students presented models at the science exhibition.

महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने सहकारी संस्थाओं में नामांकनों को दी मंजूरी
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने हाल ही में सहकारी संस्थाओं में नामांकनों को मंजूरी दी है, जिसमें सरकारी अधिकारियों और अनुभवी व्यक्तियों का समावेश होगा। इसके अलावा, पशु चिकित्सा छात्रों के इंटर्नशिप भत्ते में वृद्धि, ट्रैफिक जुर्माने में छूट, और छात्रावासों में रहने वाले छात्रों के लिए भत्ते में बढ़ोतरी जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं। गोकुल डेरी में सत्ता संतुलन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। इस लेख में इन सभी निर्णयों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

बढ़ते समुद्री जलस्तर से बचाव के लिए, न्यूयॉर्क शहर की अनूठी पहल
29 अक्टूबर 2012 को आए 'सैंडी' तूफ़ान ने न्यूयॉर्क शहर में भारी तबाही मचाई थी. तेज़ हवाओं और मूसलाधार बारिश के बीच पानी घरों, मेट्रो स्टेशनों और सुरंगों में घुस गया, बिजली ठप हो गई और कई जगह आग लगने से अनेक लोगों की जान चली गई. विशाल पैमाने पर हुए जान-माल के नुक़सान ने, न्यूयॉर्क को भविष्य की आपदाओं के लिए अपनी तैयारियों के बारे में नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया.
यूपी टेट 2013 मामले में नहीं चली हार्डडिस्क:हाईकोर्ट ने सचिव 6 नवंबर को फिर तलब किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट में यूपी टेट 2013 परीक्षा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव अदालत में हार्ड डिस्क तो लेकर पहुंचे, लेकिन उसे चलाने की व्यवस्था नहीं कर सके। इस पर कोर्ट ने मामले को 6 नवंबर को दोबारा सुनवाई के लिए लगाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अरुण कुमार की याचिका पर यह आदेश दिया। पिछले आदेश के अनुपालन में परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज के सचिव राजेंद्र प्रताप अंतिम आवेदन वाली हार्ड डिस्क के साथ हाजिर हुए। हार्ड डिस्क को लेकर फंसा पेंच सचिव के साथ अधिकारियों की एक टीम भी थी। उसने हार्ड डिस्क को अदालत में चलाने का तरीका तो समझाया, लेकिन इसके लिए जरूरी सेटअप नहीं जुटाया गया था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वे यह समझने में विफल रहे कि हार्ड डिस्क केवल संबंधित व्यक्ति की फोटो का सत्यापन करने के लिए मंगाई गई थी। इसके बाद टीम ने हार्ड डिस्क चलाने की व्यवस्था के लिए एक दिन का समय मांगा। कोर्ट ने मामले को 6 नवंबर को पेश करने का आदेश दिया। साथ ही कहा सचिव मौजूद रहेंगे। इस काम के लिए वे हाईकोर्ट में कार्यरत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की मदद ले सकते हैं

विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों में करेंगे स्थापित : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री साय ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ की... The post विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों में करेंगे स्थापित : मुख्यमंत्री साय appeared first on Asian News Service | Hindi Language News | Latest News.

डॉ. राजेश्वर सिंह : दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की वैश्विक क्रांति में भारत बने नेतृत्वकर्ता
AI, बायोटेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर का संगम बनेगा भविष्य की सबसे बड़ी इंडस्ट्री, युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर अमरता नहीं, हर नागरिक को मिले स्वस्थ और सम्मानजनक दीर्घायु जीवन दीर्घायु विज्ञान में बढ़ रहा वैश्विक निवेश लखनऊ। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने Longevity Science (दीर्घायु विज्ञान), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोटेक्नोलॉजी को भविष्य […]

देवबंद में हाईवे पर सड़क हादसे में दो की मौत: मां-बेटी की हालत नाजुक, अज्ञात वाहन ने कार में मारी टक्कर, पुलिस जांच में जुटी
देवबंद (सहारनपुर)। सहारनपुर जिले के देवबंद क्षेत्र में स्टेट हाईवे पर बुधवार की देर शाम एक भीषण सड़क हादसा हो गया। उपकारागार के पास आगे चल रहे एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने कार में जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भयावह था कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में कार सवार एक व्यक्ति और कार चालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि मृतक की पत्नी और बेटी गंभीर रूप से घायल हो गए। बेटी का इलाज कराकर घर लौट रहा था परिवार प्राप्त जानकारी के अनुसार, कासिमपुरा रोड ...

मुजफ्फरनगर में भगत सिंह रोड पर दिवाली बाजार में संघर्ष: ठियों को लेकर पटरी दुकानदारों में मारपीट, पुलिस ने संभाला मोर्चा
मुजफ्फरनगर। दीपावली पर्व को लेकर शहर के सबसे व्यस्ततम व्यापारिक केंद्र 'भगत सिंह रोड' पर अस्थायी बाजार (फुटपाथ दुकानें) सजाने की होड़ खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। शिव चौक से लेकर हनुमान चौक तक सड़क के बीचों-बीच मनचाही और अच्छी जगह (ठिए) हासिल करने के चक्कर में बुधवार को कई पटरी दुकानदार आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि सड़क पर ही तीखी धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई, जिससे बाजार में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। पैसों के एवज में अवैध कब्जा कराने का आरोप स्थानीय दुकानदारों का आरोप है ...

गुजरात : 538 जेल सिपाहियों के 20वें बैच ने नौ महीने का प्रशिक्षण किया पूरा, 60 महिलाएं भी शामिल
अहमदाबाद, 4 नवंबर (आईएएनएस)। गुजरात जेल और सुधार प्रशासन विभाग के प्रशिक्षण संस्थान, जीआईपीसीए में कुल 538 नए भर्ती किए गए जेल सिपाहियों (60 महिलाएं) ने नौ महीने का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। इस प्रशिक्षण में विभाग ने आधुनिक जेल सुरक्षा, नए आपराधिक कानूनों और कैदियों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया है।

गुजरात : 538 जेल सिपाहियों के 20वें बैच ने नौ महीने का प्रशिक्षण किया पूरा, 60 महिलाएं भी शामिल
गुजरात : 538 जेल सिपाहियों के 20वें बैच ने नौ महीने का प्रशिक्षण किया पूरा, 60 महिलाएं भी शामिल
समुद्री तूफान : प्रकृति के रौद्र रूप की चुनौती - dainiktribuneonline.com
स्वास्थ्य से जुड़े पेशे में खुलेंगे रोजगार के द्वार - dainiktribuneonline.com

Bhagalpur: विकसित भारत @ 2047 के लिए गांवों को हुनरमंद बनाने पर जोर, टीएमबीयू में राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित- GS NEWS
@ कतरनी चूड़ा, जर्दालू आम और तसर सिल्क को बेहतर बाजार देने की उठी मांग, शिक्षा, कौशल और रोजगार को ग्रामीण विकास का आधार बताया। प्रदीप विद्रोही भागलपुर। विकसित भारत @ 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और युवाओं को कुशल मानव संसाधन के रूप में तैयार करने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के ओल्ड पीजी परिसर स्थित बहुउद्देशीय सभागार में 4 एवं 5 नवंबर 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। ‘विकसित भारत @ 2047 के लिए समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मानव संसाधन विकास’ विषय पर आयोजित सेमिनार का संयुक्त आयोजन ग्रामीण अर्थशास्त्र एवं सहकारिता प्रबंधन विभाग तथा औद्योगिक संबंध एवं कार्मिक प्रबंधन विभाग ने किया। एग्रो-इकोनॉमिक्स […] The post Bhagalpur: विकसित भारत @ 2047 के लिए गांवों को हुनरमंद बनाने पर जोर, टीएमबीयू में राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित- GS NEWS appeared first on GS NEWS.

Bihar Board 12th Dummy Admit Card 2027 Subject Correction: Arts, Science और Commerce के विषयों में सुधार का पूरा प्रोसेस
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2027 में सम्मिलित होने वाले छात्र-छात्राओं के लिए डमी एडमिट कार्ड जारी करने का मुख्य उद्देश्य परीक्षा फॉर्म और रजिस्ट्रेशन में दर्ज विवरणों की जांच करना होता है। बोर्ड की आधिकारिक गाइडलाइंस के अनुसार, डमी एडमिट कार्ड कोई अंतिम प्रवेश पत्र नहीं होता, बल्कि यह परीक्षार्थियों को अपनी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारियों, विशेष रूप से नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, लिंग, जाति, फोटो, हस्ताक्षर और विषयों की जांच करने का एक अवसर प्रदान करता है। इंटरमीडिएट परीक्षा में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विद्यार्थी के चयनित विषय होते हैं। कई बार फॉर्म भरते समय ऑनलाइन ऑपरेटर या विद्यालय स्तर पर मानवीय भूल के कारण आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स संकाय (Faculty) के अनिवार्य (Compulsory), ऐच्छिक (Elective) अथवा अतिरिक्त/ऐच्छिक 6ठे विषय (Additional Subject) में गलती दर्ज हो जाती है। यदि समय रहते डमी एडमिट कार्ड में इस गलती को ठीक नहीं कराया गया, तो मुख्य एडमिट कार्ड और मार्कशीट में वही गलत विषय मुद्रित हो जाएंगे, जिससे परीक्षा के दिन केंद्र पर प्रश्नपत्र मिलने में गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। Arts, Science और Commerce: संकाय के अनुसार किन विषयों में हो सकती है गलती? इंटर परीक्षा प्रणाली में तीनों संकायों के लिए कुल 500 अंकों के मुख्य विषय और 100 अंकों का एक अतिरिक्त विषय निर्धारित होता है। डमी एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद छात्रों को अपने संकाय के अनुसार निम्नलिखित विषयों का मिलान अवश्य करना चाहिए: अनिवार्य भाषा विषय (Compulsory Language Subjects - कुल 200 अंक): भाषा 1 (Language 1 - 100 अंक): सामान्यतः हिंदी या अंग्रेजी। भाषा 2 (Language 2 - 100 अंक): पहली भाषा से भिन्न कोई अन्य भाषा (जैसे इंग्लिश, हिंदी, उर्दू, मैथिली, संस्कृत आदि)। अक्सर होने वाली गलती: छात्र ने पहली भाषा के रूप में हिंदी और दूसरी भाषा अंग्रेजी चुनी थी, लेकिन डमी कार्ड में दोनों जगह एक ही भाषा या कोई अन्य क्षेत्रीय भाषा दर्ज हो जाती है। ऐच्छिक विषय (Elective Subjects - कुल 300 अंक): Science (विज्ञान संकाय): फिजिक्स (Physics) और केमिस्ट्री (Chemistry) अनिवार्य होते हैं, जबकि तीसरे विषय में मैथमेटिक्स (Mathematics) या बायोलॉजी (Biology) का चयन होता है। कई बार छात्र बायोलॉजी मुख्य रखना चाहते हैं, लेकिन उनका गणित मुख्य विषय बन जाता है। Commerce (वाणिज्य संकाय): बिजनेस स्टडीज (Business Studies) और अकाउंटेंसी (Accountancy) मुख्य होते हैं, जबकि तीसरे विषय में इकोनॉमिक्स (Economics) या एंटरप्रेन्योरशिप (Entrepreneurship) में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। Arts (कला संकाय): इतिहास (History), राजनीति विज्ञान (Political Science), भूगोल (Geography), अर्थशास्त्र (Economics), मनोविज्ञान (Psychology), समाजशास्त्र (Sociology) या गृह विज्ञान (Home Science) जैसे विषयों में से किन्हीं तीन का चयन होता है। यहां गलत विषय कोड डलने की संभावना सबसे अधिक रहती है। अतिरिक्त विषय (Additional / 6th Subject - 100 अंक): यदि किसी छात्र ने अतिरिक्त विषय (जैसे साइंस में मैथ्स के साथ बायो या कंप्यूटर साइंस) नहीं चुना था, फिर भी कार्ड में शो हो रहा है, या चुना था और कार्ड से गायब है, तो इसमें तत्काल सुधार आवश्यक होता है। डमी एडमिट कार्ड में विषय सुधार की पूरी ऑफलाइन व ऑनलाइन प्रक्रिया बिहार बोर्ड के नियमों के मुताबिक, डमी एडमिट कार्ड केवल छात्र स्वयं डाउनलोड कर सकते हैं, लेकिन उसमें सुधार करने का सीधा ऑनलाइन अधिकार केवल संबंधित विद्यालय या इंटर कॉलेज के प्रधान (Principal) के पास होता है। छात्र व्यक्तिगत स्तर पर पोर्टल पर लॉगिन करके सीधे डेटा एडिट नहीं कर सकते। सुधार कराने की चरणबद्ध प्रक्रिया इस प्रकार है: डमी एडमिट कार्ड का प्रिंटआउट निकालें: सबसे पहले बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट (seniorsecondary.biharboardonline.com) से अपना डमी एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और उसकी दो साफ फोटोकॉपी (प्रिंटआउट) कराएं। गलत विषय को पेन से चिह्नित करें: डमी एडमिट कार्ड पर जहां विषय की सूची छपी है, वहां गलत विषय के नाम को लाल या काले पेन से काटें (स्ट्राइक करें) और उसके ठीक सामने या ऊपर सही विषय का नाम और उसका आधिकारिक सब्जेक्ट कोड (Subject Code) साफ अक्षरों में लिखें। प्रधानाचार्य के नाम औपचारिक आवेदन लिखें: अपने स्कूल या कॉलेज के प्रधान के नाम एक सादे कागज पर औपचारिक प्रार्थना पत्र लिखें। इसमें अपना नाम, रोल कोड, रजिस्ट्रेशन नंबर, संकाय (Arts/Science/Commerce) और किस विषय के स्थान पर कौन सा विषय बदलना है, इसका स्पष्ट उल्लेख करें। हस्ताक्षर कर कार्यालय में जमा करें: आवेदन पत्र के साथ मार्क की गई डमी एडमिट कार्ड की प्रति संलग्न करें। उस पर अपने और अपने अभिभावक के हस्ताक्षर करवाएं। विद्यालय कार्यालय या परीक्षा प्रभारी के पास यह दस्तावेज जमा करें और दूसरी प्रति पर रिसीविंग (पावती मुहर व हस्ताक्षर) अवश्य ले लें। स्कूल स्तर से बोर्ड पोर्टल पर ऑनलाइन अपडेशन: विद्यालय प्रधान अपने आधिकारिक यूजर आईडी और पासवर्ड के जरिए बिहार बोर्ड के सेकेंडरी/सीनियर सेकेंडरी पोर्टल पर लॉगिन करेंगे। वहां 'Student Correction' सेक्शन में जाकर छात्र का रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर त्रुटिपूर्ण विषय को हटाकर सही विषय कोड को ऑनलाइन अपडेट कर देंगे। सुधार करते समय इन महत्वपूर्ण नियमों और सीमाओं का रखें ध्यान संकाय (Stream/Faculty) परिवर्तन की अनुमति नहीं: डमी एडमिट कार्ड चरण में केवल संकाय के भीतर के विषयों में संशोधन संभव होता है। यदि कोई छात्र साइंस से आर्ट्स या कॉमर्स में पूरी स्ट्रीम बदलना चाहता है, तो बोर्ड के नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन अवधि समाप्त होने के बाद स्ट्रीम परिवर्तन की अनुमति सामान्यतः नहीं दी जाती। समय-सीमा (Correction Window): बोर्ड द्वारा डमी एडमिट कार्ड सुधार के लिए एक सीमित समय सीमा (आमतौर पर 7 से 10 दिन) तय की जाती है। निर्धारित अंतिम तिथि के बाद पोर्टल बंद हो जाता है और विद्यालय प्रधान भी कोई बदलाव नहीं कर पाते। 2nd और 3rd डमी एडमिट कार्ड: पहले चरण में सुधार दर्ज होने के बाद बोर्ड संशोधित डेटा के साथ 'द्वितीय डमी एडमिट कार्ड' (2nd Dummy Admit Card) जारी करता है। छात्रों को उसे दोबारा डाउनलोड करके यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके द्वारा दिया गया विषय सुधार पोर्टल पर सफलतापूर्वक दर्ज हो चुका है। यदि किसी छात्र के विषय में त्रुटि रह जाती है और वह सुधार नहीं करवाता, तो उसे परीक्षा में उसी गलत विषय की परीक्षा देनी पड़ सकती है, जिससे उसका पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसलिए डमी एडमिट कार्ड आते ही बिना देरी किए अपने स्कूल या कॉलेज से संपर्क करके सुधार की प्रक्रिया पूरी कर लें।