किसानों को राहत:BU के वैज्ञानिकों ने खोजा मिर्च की फसल को बर्बाद करने वाले वायरस का इलाज, बचेगी लाखों की पैदावार
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (बीयू) के सूक्ष्म जीव विज्ञान (माइक्रोबायोलॉजी) विभाग की ‘मॉलिक्यूलर प्लांट वायरोलॉजी प्रयोगशाला’ ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शोध सफलता हासिल की है। यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मिर्च की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले एक बिल्कुल नए और खतरनाक वनस्पति वायरस (प्लांट वायरस) की पहचान की है। इस वायरस के कारण मिर्च के पौधों में ‘लीफ कर्ल’ (पत्तियों का सिकुड़ना, मुड़ना और सटना) की बीमारी फैल रही थी, जिससे 55% से अधिक फसल प्रभावित हो रही थी। बीयू के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार स्नेही और शोधार्थी अक्षिता सोनी के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘इंटरनेशनल यूनियन ऑफ माइक्रोबायोलॉजी सोसाइटीज’ की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘आर्काइव्स ऑफ वायरोलॉजी’ (2026) में प्रकाशित किया गया है। जांच में खुलासा: 89% ही मिला डीएनए अनुसंधान में सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई), लखनऊ का भी तकनीकी सहयोग रहा। वैज्ञानिकों ने अनूपपुर के खेतों से बीमार पौधों के नमूने लेकर जब ‘रोलिंग-सर्किल एम्प्लीफिकेशन’ (आरसीए) और ‘जेनबैंक’ डेटाबेस के जरिए इनके जीनोम की जांच की, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। नया वायरस ‘चिली लीफ कर्ल मध्य प्रदेश वायरस’: शोध में पाया गया कि यह वायरस पहले से मौजूद किसी भी बेगोमोवायरस से केवल 89.4% से 89.5% तक ही मेल खाता है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार 91% से कम समानता होने पर उसे नया वायरस माना जाता है। इसलिए इसे ‘चिली लीफ कर्ल मध्य प्रदेश वायरस’ (ChiLCMPV) नाम दिया गया है। किसानों, आम लोगों को खोज से फायदा फसल और आर्थिक नुकसान पर लगेगी रोक: अब तक किसान अनजान वायरस पर बेअसर पुरानी दवाइयाँ छिड़कते थे, जिससे पैसा और फसल दोनों बर्बाद होते थे। अब वायरस की सटीक आनुवंशिक संरचना (जिनेटिक स्ट्रक्चर) पता चलने से कृषि वैज्ञानिक इसके खिलाफ प्रभावी कीट-नियंत्रण और सुरक्षा नीतियां तैयार कर सकेंगे। बाजार में मिर्च की कीमतों में आएगी स्थिरता: बीमारी से जब मिर्च की फसल का उत्पादन गिरता है, तो बाजार में इसके दाम अचानक बढ़ जाते हैं। वायरस पर सही समय पर काबू पाने से उत्पादन बेहतर होगा, जिससे आम उपभोक्ताओं को वाजिब दाम पर मिर्च उपलब्ध रहेगी। अन्य फसलों को भी बचाया जा सकेगा: यह वायरस मिर्च के अलावा टमाटर जैसी अन्य महत्वपूर्ण सब्जी फसलों पर भी हमला करता है। समय रहते इसकी निगरानी शुरू होने से आसपास के अन्य जिलों में फसलों को चौपट होने से बचाया जा सकेगा।
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