साक्ष्य को बताया धर्म की आंख, 5 साल बाद हत्यारोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई
भास्कर न्यूज | टोंक न्याय की बुनियाद साक्ष्य पर टिकी होती है। सत्य का कभी नाश नहीं होता। कात्यायन स्मृति के श्लोक का हवाला देते हुए अत्याचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायालय (एससी-एसटी कोर्ट, टोंक) की विशिष्ट न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने इन्हीं शब्दों के साथ 5 साल पुराने हत्या के मामले में फैसला सुनाया। इसमें कांटोली निवासी लालाराम उर्फ लाल्या (55) को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 50 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया है। विशिष्ट लोक अभियोजक मेघराज के अनुसार, 21 फरवरी 2021 को जगन्नाथ ने लांबाहरिसिंह थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसका भाई जगदीश मजदूरी से लौटकर घर पर था। शाम करीब 7.30 बजे उसने बताया कि उसे पूर्व सरपंच गोपाल के फार्म हाउस पर बुलाया गया है। बाद में परिजनों को सूचना मिली कि फार्म हाउस पर जगदीश की हत्या कर दी गई है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 26 गवाह पेश किए। 41 दस्तावेज और 8 वस्तुएं भी साक्ष्य के तौर पर दर्ज की गईं। अदालत ने माना कि लालाराम ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जगदीश के सिर पर लाठी से वार किया, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। अदालत ने जांच में गंभीर खामियों पर सख्त टिप्पणी की। फैसले में कहा गया कि पर्याप्त विशिष्ट साक्ष्य न होने के कारण रामधन को संदेह का लाभ मिला और वह दोषमुक्त हो गया। अदालत ने जांच अधिकारी चक्रवर्ती सिंह राठौड़ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए डीजीपी और एसीएस (गृह) को निर्देश दिए।
भास्कर न्यूज | टोंक न्याय की बुनियाद साक्ष्य पर टिकी होती है। सत्य का कभी नाश नहीं होता। कात्यायन स्मृति के श्लोक का हवाला देते हुए अत्याचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायालय (एससी-एसटी कोर्ट, टोंक) की विशिष्ट न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने इन्हीं शब्दों के साथ 5 साल पुराने हत्या के मामले में फैसला सुनाया। इसमें कांटोली निवासी लालाराम उर्फ लाल्या (55) को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 50 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया है। विशिष्ट लोक अभियोजक मेघराज के अनुसार, 21 फरवरी 2021 को जगन्नाथ ने लांबाहरिसिंह थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसका भाई जगदीश मजदूरी से लौटकर घर पर था। शाम करीब 7.30 बजे उसने बताया कि उसे पूर्व सरपंच गोपाल के फार्म हाउस पर बुलाया गया है। बाद में परिजनों को सूचना मिली कि फार्म हाउस पर जगदीश की हत्या कर दी गई है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 26 गवाह पेश किए। 41 दस्तावेज और 8 वस्तुएं भी साक्ष्य के तौर पर दर्ज की गईं। अदालत ने माना कि लालाराम ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जगदीश के सिर पर लाठी से वार किया, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। अदालत ने जांच में गंभीर खामियों पर सख्त टिप्पणी की। फैसले में कहा गया कि पर्याप्त विशिष्ट साक्ष्य न होने के कारण रामधन को संदेह का लाभ मिला और वह दोषमुक्त हो गया। अदालत ने जांच अधिकारी चक्रवर्ती सिंह राठौड़ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए डीजीपी और एसीएस (गृह) को निर्देश दिए।
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