बालाघाट में आदिवासी बच्चों को आखिर हो क्या रहा है?:ढाई महीने में 30+ बच्चों की मौत, सैकड़ों बीमार; क्या प्रशासन कुछ छिपा रहा है?
जून के आखिरी हफ्ते से मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एक के बाद एक बैगा और गोंड आदिवासी बच्चे मर रहे हैं। सरकार ने पहले कहा, सिर्फ 8 मौतें। गांव वाले, स्थानीय नेता और विपक्ष कहते रहे, आंकड़ा कहीं ज्यादा है। ढाई महीने बाद अब यह आंकड़ा 30 पार कर चुका है, और सैकड़ों बच्चे अब भी बीमार हैं। आखिर बच्चों को हो क्या रहा है, आदिवासी बहुल गांवों में ही मौतें ज्यादा क्यों हो रही हैं, क्या सरकार सच में कुछ छिपा रही है; मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में पूरी कहानी... पहले ये तस्वीरें देखिए सवाल 1: बालाघाट में हुआ क्या, अब तक कितने बच्चों की जान जा चुकी है? जवाब: यहां आंकड़ा ही सबसे बड़ा विवाद है। सवाल 2: आदिवासी बहुल गांवों में ही बच्चों की मौतें ज्यादा क्यों हो रही हैं? जवाब: बालाघाट पहले से हाई, रिस्क जिला रहा है, पिछले दो साल से राज्य का सबसे बड़ा मलेरिया हॉटस्पॉट है। सवाल 3: बच्चे ठीक होने के बाद वापस बीमार क्यों पड़ रहे हैं? जवाब: यहां दो अलग समस्याएं हैं, एक कुपोषण की वजह से बार, बार बीमार पड़ना, दूसरी गांवों तक स्वास्थ्य सुविधा का न पहुंचना। सवाल 4: क्या प्रशासन सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहा है? जवाब: पारदर्शिता पर सवाल जरूर उठते हैं, लेकिन सच्चाई छुपाने का निष्कर्ष निकालने से पहले प्रशासन का पक्ष जानना भी जरूरी है। तीन घटनाएं एक साथ रखने पर एक पैटर्न जरूर दिखा सवाल 5: इतना सब होने के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए? जवाब: सरकार ने अपनी तरफ से जवाब भी दिया है और कदम भी उठाए हैं... मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर का ये एपिसोड भी पढ़िए... आखिर जहरीली शराब होती क्या है, जिसने ली 22 जानें, पहले आंखों की रोशनी गई, फिर शरीर नीला पड़ा 5 सितंबर को आबकारी विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा, शराब पीने लायक है, कोई खतरा नहीं। अगले ही दिन, 6 सितंबर की सुबह, सागर के बंडा इलाके में उसी शराब को पीकर लोग एक, एक कर गिरने लगे। कोई घर पर मरा, कोई अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में। कई मरीजों के शरीर नीले पड़ गए, कइयों की आंखों की रोशनी चली गई। प्रशासन के ताजा आंकड़ों की मानें तो अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है और 112 से ज्यादा मरीज अलग, अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है...पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।
जून के आखिरी हफ्ते से मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एक के बाद एक बैगा और गोंड आदिवासी बच्चे मर रहे हैं। सरकार ने पहले कहा, सिर्फ 8 मौतें। गांव वाले, स्थानीय नेता और विपक्ष कहते रहे, आंकड़ा कहीं ज्यादा है। ढाई महीने बाद अब यह आंकड़ा 30 पार कर चुका है, और सैकड़ों बच्चे अब भी बीमार हैं। आखिर बच्चों को हो क्या रहा है, आदिवासी बहुल गांवों में ही मौतें ज्यादा क्यों हो रही हैं, क्या सरकार सच में कुछ छिपा रही है; मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में पूरी कहानी... पहले ये तस्वीरें देखिए सवाल 1: बालाघाट में हुआ क्या, अब तक कितने बच्चों की जान जा चुकी है? जवाब: यहां आंकड़ा ही सबसे बड़ा विवाद है। सवाल 2: आदिवासी बहुल गांवों में ही बच्चों की मौतें ज्यादा क्यों हो रही हैं? जवाब: बालाघाट पहले से हाई, रिस्क जिला रहा है, पिछले दो साल से राज्य का सबसे बड़ा मलेरिया हॉटस्पॉट है। सवाल 3: बच्चे ठीक होने के बाद वापस बीमार क्यों पड़ रहे हैं? जवाब: यहां दो अलग समस्याएं हैं, एक कुपोषण की वजह से बार, बार बीमार पड़ना, दूसरी गांवों तक स्वास्थ्य सुविधा का न पहुंचना। सवाल 4: क्या प्रशासन सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहा है? जवाब: पारदर्शिता पर सवाल जरूर उठते हैं, लेकिन सच्चाई छुपाने का निष्कर्ष निकालने से पहले प्रशासन का पक्ष जानना भी जरूरी है। तीन घटनाएं एक साथ रखने पर एक पैटर्न जरूर दिखा सवाल 5: इतना सब होने के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए? जवाब: सरकार ने अपनी तरफ से जवाब भी दिया है और कदम भी उठाए हैं... मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर का ये एपिसोड भी पढ़िए... आखिर जहरीली शराब होती क्या है, जिसने ली 22 जानें, पहले आंखों की रोशनी गई, फिर शरीर नीला पड़ा 5 सितंबर को आबकारी विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा, शराब पीने लायक है, कोई खतरा नहीं। अगले ही दिन, 6 सितंबर की सुबह, सागर के बंडा इलाके में उसी शराब को पीकर लोग एक, एक कर गिरने लगे। कोई घर पर मरा, कोई अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में। कई मरीजों के शरीर नीले पड़ गए, कइयों की आंखों की रोशनी चली गई। प्रशासन के ताजा आंकड़ों की मानें तो अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है और 112 से ज्यादा मरीज अलग, अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है...पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।
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