ताज़ा खबर:
भारत ने अंतरिक्ष में नया कीर्तिमान बनाया  ❯  संसद में बजट सत्र शुरू  ❯  भारत ने क्रिकेट विश्वकप जीता  ❯  शेयर बाजार नई ऊंचाई पर  ❯  नई शिक्षा नीति लागू  ❯  कैंसर की नई दवा तैयार
अच्छाशब्द
Google Ad 728×60
LIVE · व्यापार
5 नवंबर 2026
बच्चों ने पेश किए 130 वैज्ञानिक प्रोजेक्ट

बच्चों ने पेश किए 130 वैज्ञानिक प्रोजेक्ट

भास्कर न्यूज | बालोद आने वाले समय में कचरे का प्रबंधन कैसे होगा, पानी और ऊर्जा के संकट से कैसे निपटेंगे और खेती-किसानी को टिकाऊ कैसे बनाएंगे? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जिले के स्कूली बच्चे अभी से प्रयोग और अनुसंधान में जुटे हैं। कोई रसोई के कचरे से खाद बनाने का तरीका खोज रहा है तो कोई अपशिष्ट पदार्थों के बेहतर प्रबंधन पर काम कर रहा है। बच्चों की यही वैज्ञानिक सोच 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के जिला स्तरीय प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन में नजर आई। बालोद के आदर्श शासकीय कन्या उमावि मंे जिले के पांचों विकासखंडों से पहुंचे विद्यार्थियों ने 130 परियोजनाओं के जरिए भविष्य की चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत किए। बालोद में इस आयोजन की खासियत यह रही कि परियोजनाओं का केंद्र केवल किताबी विज्ञान नहीं, बल्कि स्थानीय समस्याएं और उनके व्यावहारिक समाधान रहे। कुल 130 प्रोजेक्ट में 91 सीनियर और 39 जूनियर वर्ग के थे। 130 में से राज्य स्तर के लिए 5 प्रोजेक्ट का चयन किया गया। विद्यार्थियों ने अपने आसपास की समस्याओं को पहचाना। डीईओ दीपक दुबे ने विद्यार्थियों को ऊर्जा संसाधनों के भविष्य को ध्यान में रखकर काम करने की प्रेरणा दी। 5 विषयों में तलाशे समाधान अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आर 5, ऊर्जा के लिए ई 4, जल प्रबंधन, भोजन-कृषि एवं स्वास्थ्य और सतत विकास में भारतीय ज्ञान प्रणाली का अनुप्रयोग विषयों पर परियोजनाएं तैयार की गईं। जूनियर वर्ग में शासकीय हाईस्कूल तरौद की सोनाक्षी निषाद ने अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन पर परियोजना प्रस्तुत कर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं सेजेस आमापारा की गार्गी निषाद को किचन वेस्ट से खाद बनाने की परियोजना के लिए द्वितीय स्थान मिला। प्रतियोगिता में सीनियर वर्ग में सेजेस बालोद के आदर्श यादव ने अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन के लिए प्रथम स्थान प्राप्त किया।

द
दैनिक भास्कर
5 नवंबर 2026
#dainikbhaskar
लेख सारांश

भास्कर न्यूज | बालोद आने वाले समय में कचरे का प्रबंधन कैसे होगा, पानी और ऊर्जा के संकट से कैसे निपटेंगे और खेती-किसानी को टिकाऊ कैसे बनाएंगे? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जिले के स्कूली बच्चे अभी से प्रयोग और अनुसंधान में जुटे हैं। कोई रसोई के कचरे से खाद बनाने का तरीका खोज रहा है तो कोई अपशिष्ट पदार्थों के बेहतर प्रबंधन पर काम कर रहा है। बच्चों की यही वैज्ञानिक सोच 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के जिला स्तरीय प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन में नजर आई। बालोद के आदर्श शासकीय कन्या उमावि मंे जिले के पांचों विकासखंडों से पहुंचे विद्यार्थियों ने 130 परियोजनाओं के जरिए भविष्य की चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत किए। बालोद में इस आयोजन की खासियत यह रही कि परियोजनाओं का केंद्र केवल किताबी विज्ञान नहीं, बल्कि स्थानीय समस्याएं और उनके व्यावहारिक समाधान रहे। कुल 130 प्रोजेक्ट में 91 सीनियर और 39 जूनियर वर्ग के थे। 130 में से राज्य स्तर के लिए 5 प्रोजेक्ट का चयन किया गया। विद्यार्थियों ने अपने आसपास की समस्याओं को पहचाना। डीईओ दीपक दुबे ने विद्यार्थियों को ऊर्जा संसाधनों के भविष्य को ध्यान में रखकर काम करने की प्रेरणा दी। 5 विषयों में तलाशे समाधान अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आर 5, ऊर्जा के लिए ई 4, जल प्रबंधन, भोजन-कृषि एवं स्वास्थ्य और सतत विकास में भारतीय ज्ञान प्रणाली का अनुप्रयोग विषयों पर परियोजनाएं तैयार की गईं। जूनियर वर्ग में शासकीय हाईस्कूल तरौद की सोनाक्षी निषाद ने अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन पर परियोजना प्रस्तुत कर प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं सेजेस आमापारा की गार्गी निषाद को किचन वेस्ट से खाद बनाने की परियोजना के लिए द्वितीय स्थान मिला। प्रतियोगिता में सीनियर वर्ग में सेजेस बालोद के आदर्श यादव ने अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन के लिए प्रथम स्थान प्राप्त किया।

मूल लेख पढ़ें

यह खबर bhaskar.com से ली गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए बटन पर क्लिक करें।

पूरी खबर पढ़ें

और पढ़ेंव्यापार

सभी देखें →